एक्सपर्ट से जानें, हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और संकेत, खतरे से बचाव के तरीके

डॉ. नरेश त्रेहान (मेदांता हॉस्पिटल) बता रहे हैं हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के लक्षण, इसके खतरे और बचाव के टिप्स। हर साल 17 मई को World Hypertension Day इसी लिए मनाया जाता है, ताकि लोगों को हाई ब्लड प्रेशर से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक

हर साल 1 7 मई को विश्व हाइपरटेंशन दिवस या World Hypertension Day के रूप में मनाया जाता है।हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर बीमारी है, जिसे साइलेंट किलर भी कहते हैं। इस दिन को मनाने का उद्देश्य यह है कि लोगों को हाई ब्लड प्रेशर के खतरों के बारे में बताया जाए और इसे कंट्रोल करने व ठीक करने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाए। इस साल World Hypertension Day की थीम ‘Know Your Numbers’ है।
हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक 2017 में भारत में 2.25 करोड़ से ज्यादा लोगों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पाई गई थी। इस संख्या के मुताबिक भारत में हर 8 में से 1 व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर का शिकार है। कुछ लोग इसे हाई बीपी भी कहते हैं। 57% से ज्यादा हार्ट अटैक के मामलों और 24% से ज्यादा धमनी रोगों के मामलों में प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर है। बदलती जीवनशैली के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पुरुषों और महिलाओं दोनों में तेजी से बढ़ रही है। इसलिए इस रोग से बचाव और इसके प्रभावों के बारे में जानना सभी के लिए बहुत जरूरी है।
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हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) की समस्या तब होती है, जब किसी व्यक्ति के धमनियों में बहने वाले रक्त का दबाव लगातार बढ़ता जाता है और एक निश्चित सीमा से ऊपर बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर के मामले में खून को पंप करने के लिए ज्यादा ताकत की जरूरत पड़ती है यानी हाई ब्लड प्रेशर का सीधा मतलब यह है कि आपके हृदय (हार्ट) को आपके खून को पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।
शरीर में ब्लड प्रेशर को नापने के लिए दो रीडिंग्स ली जाती हैं, जिन्हें सिस्टोलिक प्रेशर और डाइस्टोलिक प्रेशर कहते हैं। सिस्टोलिक प्रेशर के नंबर हृदय के धड़कने के दौरान आपकी धमनियों में बहने वाले खून का प्रेशर बताते हैं। जबकि डाइस्टोलिक प्रेशर के नंबर आपके हृदय की 2 धड़कनों के बीच आपके धमनियों में बढ़ने वाले प्रेशर को बताते हैं। किसी व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तब होती है जब उसका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 mm मरकरी या इससे ज्यादा हो और डाइस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90mm मरकरी या इससे ज्यादा हो।
हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और संकेत
हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते हैं, जब तक इसके कारण शरीर के अंग प्रभावित न होने लगें। आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर के कारण व्यक्ति में सिरदर्द, सांस फूलना, नाक से खून निकलना आदि लक्षण दिखाई देते हैं।
मगर ये लक्षण ज्यादातर तभी दिखाई देते हैं, जब ब्लड प्रेशर पहले ही खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका होता है या कई बार जानलेवा स्टेज तक पहुंच चुका होता है। अगर इस रोग का सही समय पर जांच या इलाज न कराया जाए, तो ये शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को बुरी तरह प्रभावित करता है और हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दूसरे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है, जिसके कारण कई बार व्यक्ति की जान चली जाती है या वो अपंग हो जाता है। जब हृदय तक खून ले जाने वाली धमनियां कमजोर हो जाती हैं या ब्लॉक हो जाती हैं, तो हृदय कमजोर हो जाता है, जो हार्ट अटैक का कारण बनता है। अगर यही समस्या मस्तिष्क की धमनियों में हो, तो स्ट्रोक का कारण बनता है।
हाई ब्लड प्रेशर का कारण
उम्र- उम्र के साथ हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ता जाता है। आमतौर पर 64 साल की उम्र के बाद पुरुषों में और 65 साल की उम्र के बाद महिलाओं में इस रोग की आशंका बहुत अधिक बढ़ जाती है।
मोटापा- मोटापा भी हाई ब्लड प्रेशर का एक प्रमुख कारण है। वजन ज्यादा होने के कारण टिशूज को ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्व सप्लाई करने के लिए ज्यादा रक्त की जरूरत पड़ती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर की समस्या शुरू हो जाती है।
तंबाकू का सेवन- तंबाकू का सेवन (सिगरेट, बीड़ी, पान, गुटखा, सुर्ती आदि के रूप में) करने पर भी ब्लड प्रेशर काफी बढ़ जाता है। तंबाकू में मौजूद केमिकल्स धमनियों को कमजोर कर देते हैं, जिससे धमनियां सिकुड़ने लगती हैं और व्यक्ति को हार्ट अटैक हो जाता है।
ज्यादा नमक का सेवन- नमक का ज्यादा सेवन करने या पोटैशियम वाले आहारों का कम सेवन करने से भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि पोटैशियम शरीर में सोडियम की मात्रा को बैलेंस करने में मदद करता है।
शराब का सेवन और तनाव- ज्याद शराब पीने और तनाव के कारण भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती है।
हाई ब्लड प्रेशर का इलाज
ज्यादातर लोग अपने ब्लड प्रेशर की जांच रेगुलर नहीं करवाते हैं इसलिए उन्हें इसके खतरों के बारे में पता नहीं चलता है। अगर हाई ब्लड प्रेशर का पता शुरुआती अवस्था में ही जांच के द्वारा लगा लिया जाए, तो इसे ठीक किया जा सकता है और इससे होने वाले खतरों को रोका जा सकता है। हाई ब्लड प्रेशर को दवाओं, डाइट में बदलाव और एक्सरसाइज के द्वारा ठीक किया जा सकता है।
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आपका भोजन ऐसा होना चाहिए जिसमें डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, पनीर, दही) आदि लो फैट हों। इसके अलावा मोटे अनाज, अंडा, मछली, फल और सब्जियों का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कम करने में मदद मिलती है।
आपको यह सलाह दी जाती है कि आप नमक का सेवन बहुत कम मात्रा में करें और पोटैशियम वाले आहारों का सेवन ज्यादा करें। एक दिन में 1500 मिलीग्राम से ज्यादा नमक का सेवन नहीं करना चाहिए।
रोजाना 30 मिनट एक्सरसाइज जैसे- पैदल चलना, जॉगिंग करना, स्विमिंग करना (तैराकी), साइकिल चलाना आदि जरूर करें। इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है।
इसके अलावा कुछ लोगों को हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने के लिए दवाओं की भी जरूरत पड़ती है।

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