एक ऐसी घटना जब एक क्रूर शासक डर के मारे सहम गया था, जानें क्या थी कहानी…

बादशाह औरंगजेब का नाम तो आप सभी ने सुना है। औरंगजेब को मुगल साम्राज्य का सबसे क्रूर और कट्टर शासक माना जाता था।
धार्मिक रूप से कट्टर औरंगजेब के साथ एक बार कुछ ऐसा हुआ जिसके चलते उन्हें महादेव के सामने नतमस्तक होना पड़ा।
इस बात का प्रमाण आज भी देश के इस प्रान्त में देखने को मिलता है।

शक्तिशाली,क्रूर,निडर औरंगजेब शायद पहली बार अपनी जिंदगी में किसी के सामने सिर झूकाकर अपनी गलती स्वीकार की और धार्मिक कट्टरता का त्याग करते हुए हिंदुओं के एक मंदिर को बनाने का आदेश दिया। यह मंदिर है चित्रकूट बालाजी का मंदिर जो कि उत्तर प्रदेश में स्थित है।
प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार औरंगजेब जब चित्रकूट आया तो उन्होंने उस दौरान अपनी सेना को भगवान शिव के प्राचीन मत्यगयेंद्र मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था।
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आदेशानुसार जब अगली सुबह उनके सिपाही उस मंदिर को तोड़ने के लिए गए तो अचानक से उनके पेट में दर्द शुरू हो गया।यह दर्द इस कदर था कि वे इसे सहन नहीं कर पाए और वे बेहोश हो गए।
सिपाहियों की बिगड़ती हुई स्थिति को देखकर औरंगजेब घबरा गया। उन्होंने सभी को ठीक करने की बहुत कोशिश की, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी रही। उस वक्त वहां मौजूद एक शख्स ने औरंगजेब को बाबा बालक दास के पास जाने की सलाह दी।
उस शख्स का ऐसा कहना था कि इनका इलाज सिर्फ वही कर सकते हैं।
बाबा बालक दास के पास जाकर औरंगजेब ने अपने सिपाहियों के जीवन की भीख मांगी। बाबा ने तत्काल शिव मंदिर को तोड़ने से रोकने की सलाह दी।औरंगजेब ने बिल्कुल वैसा ही किया। उन्होंने तुरंत मंदिर को तोड़ने के आदेश पर रोक लगा दी।
उनके ऐसा करने से सारे सिपाही ठीक होने लगे।
बाबा के इस चमत्कार को देखकर बादशाह आश्चर्यचकित हो गया। औरंगजेब को किसी अलौलिक शक्ति के होने का एहसास हो गया। औरंगजेब ने अपने विश्वसनीय सिपह सलाहकार गैरत खां को चित्रकूट में रहकर एक भव्य मंदिर बनवाने का आदेश दिया।
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आगे चलकर यह मंदिर चित्रकूट बालाजी मंदिर के नाम से विख्यात हुआ।
सिर्फ इतना ही नहीं आज से करीब 333 साल पहले बादशाह औरंगजेब ने इस चित्रकूट बालाजी मंदिर में राजभोग और पूजा के लिए आवश्यक धन के लिए 8 गांवो की 330 बीघा जमीन और राजकोष से 1 चांदी का सिक्का हर रोज देने का फरमान जारी किया था।
चित्रकूट बालाजी मंदिर में आज भी उस फरमान की छायाप्रति मौजूद है।

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