चीन को मिली बड़ी कामयाबी, बना ली कोरोना वायरस की सबसे पहले वैक्सीन…

कोरोना संकट से जूझ रही पूरी दुनिया के लिए चीन से अच्छी खबर आई है। अमेरिकी दवा कंपनी मोडेर्ना द्वारा कोविड-19 वैक्सीन के पहले फेज के सफल ट्रायल की घोषणा के बाद अब शुक्रवार को शोधकर्ताओं ने कहा कि चीन में विकसित एक वैक्सीन सुरक्षित लगती है और लोगों को खतरनाक कोरोना वायरस से बचा सकती है।

द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन जर्नल लैंसेट में प्रकाशित शुरुआती चरण के परीक्षण का हवाला देते हुए कहा गया कि जिन लोगों को वैक्सीन की एक खुराक मिली उन्होंने कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाओं (इम्यून सेल) का निर्माण किया, जिन्हें टी कोशिका (टी सेल) कहा जाता है। वैक्‍सीन की वजह से टी सेल (इम्यून सेल) दो हफ्तों में मजबूत हुए जो कोरोना संक्रमण से बचा सकते हैं। जबकि इम्यूनिटी को बढ़ाने के लिए शरीर में बनने वाले एंटीबॉडी वैक्सीन का डोज देने के 28 दिन बाद तैयार हुए।
कई प्रयोगशालाओं में शोधकर्ताओं द्वारा परीक्षण किया गया और इस ट्रायल में 18-60 आयु वर्ग के 108 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। बता दें कि दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले 52 लाख से अधिक हो गए हैं।
बोस्टन में बेथ इजराइल डीकॉन्से मेडिकल सेंटर में वैक्सीन अनुसंधान के निदेशक डॉ. डेनियल बारोच जो कि इस कार्य में शामिल नहीं थे, उन्होंने स्वीकार किया कि ‘यह एक आशाजनक डेटा है’ लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि यह ‘शुरुआती डेटा है।’ दरअसल, दुनियाभर में कई टीमें कोविड-19 के लिए वैक्सीन विकसित करने की दौड़ में शामिल हैं, मगर अब तक किसी को भी पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है।
डॉ बरोच और उनके सहयोगियों ने भी एक अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें कहा गया कि उनके प्रोटोटाइप वैक्सीन ने बंदरों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचाया गया है। चीन की एडी-5 वैक्‍सीन को वायरस के साथ बनाया गया है, जो मानव कोशिका में जेनेटिक इंस्ट्रक्शन को ले जाता है। उसके बाद कोशिका कोरोना वायरस प्रोटीन बनाना शुरू कर देती है। इम्यून सिस्टम यानी कि प्रतिरक्षा प्रणाली प्रोटीन को पहचानना और उस पर हमला करना सीखती है

 

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