जानिए तुंगनाथ मंदिर की खासियत , वहीं अध्यात्म के साथ- साथ प्राकृतिक खूबसूरती का भी मिलेगा नजारा

सावन का पावन पर्व शुरू हो चुका है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया है। अगर आप भी भोलेनाथ के भक्त हैं और सावन के इस खास महीने में भगवान शंकर की कृपा पाना चाहते हैं तो इस मंदिर पर जरुर मत्था टेकें।
 
 

वहीं जिस मंदिर के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं वह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर है। आइए जानते हैं तुंगनाथ मंदिर के बारे में। जहां पंच केदारों में से एक तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचाई पर मौजूद शिव मंदिर है। यह शिव मंदिर तुंगनाथ माउंटेन रेंज में समुद्र तल से 3680 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक इस मंदिर का निर्माण धनुधर अर्जुन ने किया था। तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ होता है पीक के भगवान।
 
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बतादें की तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव के हाथ की पूजा की जाती है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर नंदी बैल की पत्थर की मूर्ति है, जो पौराणिक कथाओं के मुताबिक भगवान शिव के सवारी हैं। इसके अलावा अलग-अलग देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर इस मंदिर के आसपास आपको मिल जाएंगे। तुंगनाथ की चोटी तीन धाराओं का स्रोत है, जिनसे अक्षकामिनी नदी बनती है। मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित है और चोपता से तीन किलोमीटर दूर स्थित है।
दरअसल सर्दियों के वक्त बर्फ पड़ने की वजह से शिवलिंग को यहां से चोपता लाया जाता है। इस दौरान ग्रामीण पूरे ढोल के साथ शिव को ले जाते हैं और गर्मियों में वापस रखते हैं। ब्रिटिश शासनकाल में कमिश्नर एटकिन्सन ने कहा था कि जिसने अपने जीवन में चोपता नहीं देखा, उसका जीवन व्यर्थ है।
पुराणों केअनुसार रामचंद्र शिव को अपना भगवान मानकर पूजते थे। कहा जाता है कि लंकापति रावण का वध करने के बाद प्रभु श्रीराम ने तुंगनाथ से डेढ़ किलोमीटर दूर चंद्रशिला पर आकर ध्यान किया था। रामचंद्र ने यहां कुछ वक्त बिताया था। 14,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चंद्रशिला पहुंचकर आप विराट हिमालय की सुदंर छटा का आनंद ले सकते हैं।
 

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