जानिए दुनिया का पहला डिजिटल कैमरे का वजन , जिसने फोटोग्राफी की दुनिया में लाई थी क्रांति…

आज के समय में सेल्फी लेने का बहुत ज्यादा चलन हो गया हैं। बच्चे से लेकर बड़े – बुर्जुग तक सेल्फी  लेने से पीछे नही हटते हैं। वहीं बतादें कि क्या आपको पता हैं स्मार्टफोन से पहले लोग कैमरे से फोटो खीचते थे तब सेल्फी नहीं होती थी।

खबरों के मुतबिक आजकल फोटो खींचना हर किसी को पसंद है। फटोग्राफी का शौक रखने वाले लोग महंगे से महंगा कैमरा खरीदते हैं। बात चाहे सालों पहले की हो या अब की। कैमरे के प्रति लोगों का क्रेज हमेशा से ही बढ़ा है। पहले जहां ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें खींचने वाले कैमरे आते थे, वहीं अब बाजार में रंग-बिरंगी तस्वीरें खींचने वाले डिजिटल कैमरे आते हैं। कैमरे की मदद से ही हमारे जीवन के खास पल फोटो के रूप में कैद हो जाते हैं। आइए जानते हैं दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा कब आया था और उसकी क्या खासियत थी।

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जहां सालों पहले जहां कैमरे में रील डाली जाती थी, वहीं अब डिजिटल कैमरों ने फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति ला दी है। साल 1975 में ईस्टममैन कोडक के स्टीवन सैसन नाम के एक इंजीनियर ने दुनिया का सबसे पहला डिजिटल कैमरा बनाने का प्रयास किया था। स्टीवन सैसन के इस कैमरे को पहले डिजिटल स्टैन स्नैपर के रूप में पहचाना जाता था।
जाने इसकी  खासियत –

इस कैमरे में फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर द्वारा विकसित तत्कालीन टेक्नोलॉजी वाले CCD इमेज सेंसर का प्रयोग किया गया था।
कैमरे का वजन करीब चार किलोग्राम था।
इस कैमरे मे ब्लैक एंड व्हाइट फोटो खींची जाती थी।
कैमरा का रिजॉल्युशन 0.01 मेगा पिक्सेल था।
दिसंबर 1975 में पहली डिजिटल तस्वीर को रिकॉर्ड करने में इस कैमरा को 23 सेकंड का समय लगा था।

दरअसल साल 1991 में ईस्टमैन कोडक कंपनी ने डिजिटल कैमरों की बिक्री शुरू की, जिसके बाद एपल कंप्यूटर और ईस्टमैन कोडक ने पहला कंज्यूमर मॉडल पेश किया। यह साल 1994 में पेश किया गया था। दोनों कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर पेश किया था, जिसके माध्यम से डिजिटल कैमरे से खींची गई तस्वीर कंप्यूटर में ट्रांसफर की जाने लगी।

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