जानें मूंगफली और चना से मिलने वाले कुछ खास फायदे

चना और मूंगफली की पौष्टिक क्षमता का वर्णन तो इतिहास से लेकर विज्ञान तक में मिलता है। जहां चना ताकत का अच्छा स्रोत माना जाता है, वहीं मूंगफली एक संपूर्ण आहार समझा जाता है। आइए जानते हैं इनके बारे में कुछ और . . .

चना भारत में व्यापक तौर पर उगाया और खाया जाता रहा है। परंपरागत रूप से इसे घुड़दौड़ के घोड़ों को खिलाया जाता था, क्योंकि यह तत्काल ताकत देता है और प्रोटीन का जबरदस्त स्रोत है। साथ ही यह आहारीय लौह तत्व (आयरन) और कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत है और प्रोटीन के सबसे अच्छे शाकाहारी स्रोतों में एक है।
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लेकिन गरमी के मौसम में अगर चने खाने से आपके शरीर में अधिक गर्मी हो रही है, तो उसे अंकुरित मूंग खाकर संतुलित किया जाना चाहिए।
लेकिन, कैल्शियम और आयरन कुछ रासायनिक घेरों में होते हैं जिसके कारण शरीर काफी हद तक उन्हें ग्रहण नहीं कर सकता। चने का अंकुरण एक साधारण विधि है, जो इन घेरों को तोडक़र आयरन और कैल्शियम को शरीर के लिए आसानी से उपलब्ध करा देता है, जिससे उसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। अंकुरित चना आसानी से पच भी जाता है।
चने
चने को अंकुरित करने का एक आसान तरीका है कि साधारण चने को एक साफ कपड़े में बांध दें। उस पोटली को छह से आठ घंटों तक पानी से भरे एक बरतन में रखें। पोटली को बाहर निकाल कर चने को दूसरे कपड़े में खाली कर दें। इस नई पोटली को कम से कम तीन दिनों तक छोड़ दें। इस समय तक चना अंकुरित हो जाएगा और अंकुर लगभग आधे इंच के बराबर हो जाएगा। अंकुरित चने को कच्चा खाया जा सकता है लेकिन उसे अच्छी तरह चबाया जाना चाहिए।
चना शरीर में गर्मी का स्तर बढ़ाता है जिसे आयुर्वेद में उष्ण कहा गया है। उष्ण खाद्य पदार्थों से बरसात के मौसम में होने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम से बचने में मदद मिलती है। लेकिन गरमी के मौसम में अगर चने खाने से आपके शरीर में अधिक गर्मी हो रही है, तो उसे अंकुरित मूंग खाकर संतुलित किया जाना चाहिए।
मूंगफली
मूंगफली की अपनी मीठास होती है लेकिन कम लोगों को ही पता होगा कि ये स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है. ज्यादातर लोग तो इसे स्वाद के लिए ही खाते हैं पर यकीन मानिए इससे होने वाले फायदे जानकर आप भी चौंक जाएंगे.
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मूंगफली एक संपूर्ण आहार है। भारत में बहुत से योगी कुछ समय के लिए सौ फीसदी मूंगफली के आहार पर चले जाते हैं, क्योंकि वह अपने आप में एक संपूर्ण भोजन है। मूंगफली को पानी में कम से कम छह घंटे भिगोना चाहिए, जिससे उसके कुछ हानिकारक तत्व निकल जाते हैं, जिन्हें आयुर्वेद में पित्त कहा जाता है। अगर उसे बिना भिगोए खाया जाए, तो इससे त्वचा पर दाने और अरुचि हो सकती है।
1. मूंगफली में मौजूद तत्व पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देने का काम करते हैं. इसके नियमित सेवन से कब्ज की समस्या दूर हो जाती है.
2. मूंगफली खाने से शरीर को ताकत मिलती है. इसके अलावा ये पाचन क्रिया को भी बेहतर रखने में मददगार है.
3. गर्भवती महिलाओं के लिए मूंगफली खाना बहुत फायदेमंद होता है. इससे गर्भ में पल रहे बच्चे का विकास बेहतर तरीके से होता है.4. ओमेगा 6 से भरपूर मूंगफली त्वचा को भी कोमल और नम बनाए रखता है. कई लोग मूंगफली के पेस्ट का इस्तेमाल फेसपैक के तौर पर भी करते हैं.
5. मूंगफली खाने से दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है.
6. मूंगफली के नियमित सेवन से खून की कमी नहीं होने पाती है.
7. बढ़ती उम्र के लक्षणों को रोकने के लिए भी मूंगफली का सेवन किया जाता है. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट बढ़ती उम्र के लक्षणों जैसे बारीक रेखाएं और झुर्रियों को बनने से रोकते हैं.
8. इसमें कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा होती है. ऐसे में इसके सेवन से हड्डियां मजबूत बनती हैं.
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मूंगफली के पौधे की उत्पत्ति दक्षिण अमेरिका में हुई।
लगभग 5,000 साल पहले भारत और चीन में मूंगफली का सेवन किये जाने का पुरातात्विक प्रमाण है।
1492 में समुद्री मार्ग से कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी। लेकिन एशिया में मूंगफली का सेवन इससे पहले से किया जाता रहा है। कुछ पुरातत्वविद् इस बात को सबूत मानते हैं, कि एशिया और दक्षिणी अमेरिका के बीच 1492 से काफी पहले से व्यापार या संपर्क था।
मूंगफली असल में एक मेवा नहीं है। वह एक फली है। हाल के समय में मूंगफली ने बहुत लंबा सफर तय किया है। अपोलो 14 के कमांडर एलन शेफर्ड चांद पर अपने साथ एक मूंगफली लेकर गए – एस्ट्रो-नट!

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