प्रधानमंत्री आवास के 500 ऐसे लाभार्थी हैं, जो आज भी है शौचालय विहीन

जिले को खुले में शौच से मुक्त कर दिया गया है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास के  लाभार्थियों  को आज भी शौचालयों की दरकार है। वह खुले में जाने को मजबूर हैं। जनपद के पांच सौ लाभार्थियों के यहां आज तक शौचालय बनकर तैयार नहीं हो सके। ग्राम्य विकास आयुक्त इस पर खफा हैं। अधिकारियों से इस पर सत्यापन कर तत्काल रिपोर्ट मांगी है।
शासन ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत लाभार्थियों को आवास उपलब्ध करा रही है। इसके लिए 1.20 लाख रुपये रुपये तीन किश्तों में दिए जा रहे हैं। वर्ष 2016 से 2019 तक 25112 लाभार्थियों का चयन हुआ और उनके आवास बनकर तैयार हो गए। लेकिन 500 ऐसे लाभार्थी हैं, जो आज भी शौचालय विहीन हैं। पंचायती राज विभाग से इन लाभार्थियों के यहां आवास बनवाए जाने का प्रावधान है। लेकिन चक्कर लगाने के बाद भी इनके शौचालय नहीं बन सके। ऐसे में इन्हें आज भी खुले में शौच जाने की मजबूरी है। यह स्थित तब जब जनपद को खुले में शौचमुक्त घोषित किया जा चुका है। लेकिन अधिकारी केंद्र सरकार के स्वच्छता मिशन को पलीता लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास के 24614 लाभार्थियों के यहां आवास बने हैं। इनमें आधे से ज्यादा घटिया होने की वजह से निष्प्रयोज्य पड़े हैं। वर्ष 2019-20 में 8885 लाभार्थियों को चयनित किया गया है। इनके आवास भी बनकर लगभग तैयार हैं,लेकिन 173 लाभार्थी शौचालय की सुविधा से वंचित हैं। ग्राम्य विकास आयुक्त ने परियोजना अधिकारी से अब तक शौचालय विहीन लाभार्थियों की सूची तलब की है। इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की।
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क्या कहते हैं लाभार्थी :
-प्रधानमंत्री आवास का कार्य पूरा हो गया है। लेकिन अभी तक शौचालय नहीं मिला। इससे खुले में शौच जाना पड़ता है। खासकर बारिश में ज्यादा दिक्कतें होती हैं।-लल्लू
-आवास बनवाने के बाद शौचालय बनवाने के लिए प्रधान व सचिव के चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कमीशन के बिना कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ता है।-मुन्ना
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बोले अधिकारी :
-प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जो भी लाभार्थी शौचालय से वंचित हैं उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही उनके यहां शौचालय बनवाए जाएंगे।
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