बाल श्रम कर चुके पुलिसकर्मी ने उठाई इसके खिलाफ आवाज, देखें इनका सफर

बचपन में रोजी-रोटी के लिए बाल श्रम करने वाले प्रशिक्षु सिपाही ने बुधवार को ‘बाल श्रम निषेध दिवस’ के मौके पर इसे समाज से मिटाने का संकल्प लिया है।

बिहार पुलिस अकादमी के 22 वर्षीय रोहित महतो अपना प्रशिक्षण काल खत्म होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि वह इस सामाजिक खतरे से निपटने के लिए उचित कदम उठा सके।
महतो 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़ गुजरात के सूरत चले गए थे, जहां वह अपने परिवार की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए जरी का काम किया करते थे।
इससे पहले वह बिहार के पश्चिमी चंपारण में रहते थे।
उन्हें हर दिन सात से आठ घंटे काम करने के लिए 8,000-10,000 रुपए प्रति माह मिला करते थे।
महतो ने कहा, ‘‘ हमारा वेतन इस बात पर निर्भर करता था कि हम क्या काम करते हैं। ऐसा भी वक्त था जब मुझे अपने परिवार से बात करने तक का समय भी नहीं मिलता था। ’’
महतो के दोबारा स्कूल जाने का सफर भी आसान नहीं था क्योंकि उनके माता-पिता इसके खिलाफ थे। आखिरकार एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के हस्क्षेप के बाद वे उन्हें स्कूल भेजने का राजी हो गए।
महतो को यह बात स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं है कि पढ़ाई छोड़ना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा गलत फैसला था।
वह आज जो कुछ भी हैं उसका सारा श्रय एनजीओ ‘चाइल्ड राइट एंड यू’ (क्राइ) को देते हैं, जो उनकी जिंदगी को बाल श्रम की दलदल से निकाल सामान्य पटरी पर लाया।
महतो ने पुलिस अकादमी में कहा कि वह अपने बीते हुए कल को भूल जाना चाहते हैं लेकिन अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचने का हर संभव प्रयास कर वह उन्हें इस खतरे से अवगत कराएंगे।
‘बाल श्रम निषेध दिवस’ के मौके पर महतो ने कहा, ‘‘ वह सब पर बिता हुआ कल है… मेरे सेवा में शामिल होने के बाद मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि मैं इससे निपटने के लिए अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंच पाऊं।’’
लखनऊ की कोर्ट ने पत्नी की याचिका पत्रकार प्रशांत को किया रिहा, लेकिन रखीं ये 3 शर्तें !
साथ ही उन्होंने नागरिक समाज, सरकारी एजेंसियों और जनता से इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने की अपील भी की।
The post बाल श्रम कर चुके पुलिसकर्मी ने उठाई इसके खिलाफ आवाज, देखें इनका सफर appeared first on Live Today | Hindi TV News Channel.

loading...