बिहारः चमकी बुखार के खौफ से गांव छोड़ने को मजबूर हो रहे लोग, नहीं मिल रही राहत

बिहार में फैले जानलेवा चमकी बुखार का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. देखते ही देखते इस बीमारी ने महामारी का रूप ले लिया है और 113 बच्चों की जान लील ली है. अब ये खौफ इतना फैल गया है कि लोग अपना गांव छोड़कर जा रहे हैं. क्योंकि मां-बाप के मन में खौफ है कि कहीं उनके बच्चे भी इसी बीमारी का शिकार ना हो जाएं. मुजफ्फरपुर के अलावा वैशाली के कई गांवों से भी लोग पलायन कर रहे हैं.

ऐसी ही एक कहानी है वैशाली जिले के भगवानपुर ब्लॉक की. जहां हरवंशपुर गांव में चमकी बुखार की वजह से 6 बच्चों की मौत हो गई है. लाश की उम्र जितनी कम होती है, उतना ही दर्द उसे कंधों पर उठाने में होता है. हरवंशपुर की त्रासदी ये ही है.
गांव में 6 बच्चे दम तोड़ चुके हैं, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई अभी तक सुध लेने नहीं आया है. इसी गांव के चतुरी सहनी के दो बेटों को ये बीमारी हुई, पहले बड़ा बेटा बीमार हुआ और फिर छोटा, और दोनों ने ही दम तोड़ दिया.
इसी घर से आगे बढ़ें तो राजेश सहनी का दर्द भी कुछ ऐसा ही है. उनकी 7 वर्ष की बेटी का जीवन भी इसी तरह खत्म हुआ. मुजफ्फरपुर के ही मेडिकल कॉलेज में उसकी मौत हो गई और जब बारी पार्थिव शरीर को ले जाने की आई तो घंटों अस्पताल में इंतजार भी करना पड़ा.
इस गांव में 6 बच्चों की जान चले जाने की वजह से यहां सूना पड़ा है. लोग अपने परिवारवालों को दूसरे गांव में भेज रहे हैं, ताकि वो इस बीमारी का शिकार ना हों. कुछ लोग मजबूरी में हैं, इसलिए गांव नहीं छोड़ पा रहे हैं. हालांकि, उनकी शिकायत है कि कोई उनकी सुध क्यों नहीं ले रहा है.
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बताया जा रहा है कि वैशाली जिले में 17 बच्चों की मौत हुई है लेकिन इनमें से कई बच्चों को एईएस से मरने वाले बच्चों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है. हरवंशपुर गांव के लोगों ने बताया कि इन्हें इस बीमारी की पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी. लेकिन जब ये घटनाएं होने लगीं तब आंगनबाड़ी की सेविकाएं उन्हें इस बीमारी के बचाव के बारे में बताने आई थीं.
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