मोदी सरकार ने तय कर लिया एजेंडा, इन 3 चीजों पर रहेगा फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी दूसरी पारी की प्राथमिकताएं तय कर दी हैं. उन्होंने देश के वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ बैठक में ये साफ निर्देश दिए कि विभाग अपनी नीति और भविष्य का एक्शन प्लान बनाते समय आम आदमी का जरूर ध्यान रखें. बैठक में शामिल एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रधानमंत्री का फोकस कृषि, रोजगार और आयात यानी AEI पर है.

सरकार की प्राथमिकता में खेती-किसानी (Agriculture), रोजगार (Employment) को बढ़ाना और आयात (Import) को घटाना है. प्रधानमंत्री ने सभी नौकरशाहों को साफ-साफ संकेत दे दिया है कि हर विभाग अपनी नई नीति बनाते समय इन तीन बातों का जरूर ध्यान रखें. यानी हर विभाग अपने एजेंडे में कृषि, रोजगार और आयात कम करने को प्राथमिकता देगा.

कैसे काम करेगा AEI

प्रधानमंत्री के निर्देश के अनुसार, हर मंत्रालय इस बात का ध्यान रखेगा कि उसकी आने वाली नीति और भविष्य की योजनाओं से कृषि और किसानों को क्या फायदा होना है. क्योंकि, प्रधानमंत्री जल्द से जल्द किसानों की आय दोगुनी करना चाहते हैं. सभी विभागों के मंत्री और सचिव कृषि मंत्रालय के साथ तालमेल कर ऐसी नीति और योजनाएं बनाएंगे, ताकि किसानों की आय जल्द से जल्द और ज्यादा से ज्यादा बढ़ाई जा सके.

रोजगार के लिए ये रणनीति

साथ ही विभागों को रोजगार पर भी ध्यान रखना है. इसके लिए मंत्रियों और विभागीय सचिवों को साफ-साफ संकेत दिया गया है कि विभाग आने वाले पांच सालों की जो एक्शन प्लान तैयार करेंगे, उसमें इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि हर विभाग किस तरह ज्यादा से ज्यादा रोजगार पैदा कर सकता है. इसके लिए उन्हें सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्रालय के साथ तालमेल रखने के लिए कहा गया है.

आयात को कम करने का लक्ष्य

प्रधानमंत्री देश में आयात को भी कम से कम करना चाहते हैं, ताकि विदेशी मुद्रा का भंडार बचा रहे. भारत दुनिया में आर्थिक महाशक्ति के रुप में उभरे, इसके लिए सभी मंत्रालयों को ऐसी नीति और योजनाओं बनाने के निर्देश दिए गए है, जिससे देश में आयातित होने वाले सामानों की संख्या कम से कम हो सके. इसके लिए विभाग वाणिज्य मंत्रालय से तालमेल कर अपनी नीति बनाएंगे.

प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सभी विभागों के सचिव जोर-शोर से सरकार की नई नीति और एक्शन प्लान बनाने में जुट गए है. साथ ही सभी विभागों ने अपनी योजना में सरकार के AEI के एजेंडा को शामिल करने के लिए नए-नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं.


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