यह पूर्णिमा है बेहद खास, मिलता है 32 गुना ज्यादा फल

हिंदू मान्यताओं के आधार पर हर दिन अलग-अलग व्रत और त्योहार मनाए जाते हैं। इसी आधार पर कल यानि कि 12 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा का व्रत रखने का विधान है। इस पूर्णिमा पर स्नान, दान और व्रत रखने का विधान है। साथ ही इस दिन भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। इस साल यह व्रत कल मनाया जाएगा। इस पूर्णिमा का उतना ही महत्व है जितना कि कार्तिक पूर्णिमा का है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व
इस दिन का महत्व हम सभी के लिए काफी फलदायी है क्योंकि इस दिन व्रत रखने से सभी मान्यताएं पूरी होती हैं। इस दिन को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन तीर्थ या किसी पवित्र नदी में स्नान करने की अपनी अलग ही मान्यता है। कहा जाता है कि नदी में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं।
इस पूर्णिमा का 32 गुना अधिक फल मिलता है
पुराणों के अनुसार इस पूर्णिमा पर तुलसी की जड़ की मिट्टी से पवित्र सरोवर में स्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। इस दौरान ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। इस दिन दान का फल अन्य पूर्णिमा व दिनों की तुलना में 32 गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए इसे बत्तीसी पूर्णिमा भी कहा जाता है।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा की पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर के पूरे घर में सफाई के बाद गौमूत्र छिड़के।
घर के बाहर रंगोली बनाएं और मुख्य द्वार पर बंदनवार लगाएं।
अगर संभव हो तो पूजा के स्थान पर गाय के गोबर से लीपें और गंगाजल छिड़कें।
तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और प्रणाम कर के तुलसी पत्र तोड़ें।
ताजे कच्चे दूध में गंगाजल मिलाकर भगवान विष्णु-लक्ष्मी और श्रीकृष्ण एवं शालग्राम का अभिषेक करें।
अबीर, गुलाल, अक्षत, चंदन, फूल, यज्ञोपवित, मौली और अन्य सुगंधित पूजा साम्रगी के साथ भगवान की पूजा करें और तुलसी पत्र चढ़ाएं।
इसके बाद सत्यनारायण भगवान की कथा कर के नैवेद्य लगाएं और आरती के बाद प्रसाद बांटें।
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क्या करें इस दिन
इस दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए साथ ही नदी में स्नान करना अच्छा माना जाता है।
सुबह व्रत का संकल्प लेकर दिनभर व्रत रखें और वस्त्र एवं खाने की चीजों का दान करें।
इस दिन तामसिक चीजों जैसे लहसुन, प्याज, मांसाहार, मादक वस्तुएं और शराब से दूर रहें।
दिन में न सोएं और झूठ न बोलें।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर भगवान सत्यनारायण की पूजा व कथा की जाती है।
इस व्रत को रखते समय इस बातों का ध्यान रखना चाहिए कि आप किसी का दिल ना दुखा दें।
आपस में बहुल प्यार से रहना चाहिए।
पूजा में भगवान को चूरमा का भोग लगाना चाहिए।
अपने हिसाब से गरीबों को भोजन कराना चाहिए।
ऐसा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं।
इस व्रत को रखने से काफी शांति मिलती है।
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