SC पहुंचे स्‍पीकर, बोले- फैसला लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता निर्देश

नई दिल्ली: Karnataka Crisis: कर्नाटक में मचे सियासी घमासान के बीच अब कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं. स्पीकर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके और वक्त की मांग की है. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि उनका संवैधानिक कर्तव्य और विधानसभा नियम के मुताबिक वो ये सत्यापित करने के लिए बाध्य हैं कि विधायकों के इस्तीफे स्वैच्छिक या बिना डर के हैं या नहीं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें वक्त नहीं दिया और उनकी अर्जी पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि हमने सुबह आदेश जारी कर दिया है. 

स्पीकर की ओर से पेश हुए वकील अभिषेक मनु सिंसवी ने कहा कि उनकी याचिका शुक्रवार को मुख्य मामले के साथ सुन ली जाए. सीजेआई ने कहा कि आप पहले रजिस्ट्री से संपर्क करें. इसके साथ ही कहा कि हम कल करेंगे सुनवाई. 

स्पीकर ने याचिका में कहा है कि इस तरह की जांच को आज आधी रात तक पूरा नहीं किया जा सकता. साथ ही कहा है कि वह बागी विधायकों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही को भी देख रहे हैं और उसमें भी वक्त लगेगा. ऐसे में वो बागी विधायकों के इस्तीफे की स्वैच्छिक प्रकृति का फैसला करना कम वक्त में संभव नहीं है क्योंकि इस मामले में उचित जांच की जरूरत है.

बता दें, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस और जेडीएस के 10 बागी विधायकों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि स्पीकर को उनके इस्तीफों पर आज ही फैसला लेना होगा. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों से कहा है कि वे आज शाम छह बजे तक स्पीकर के सामने पेश हों. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस्तीफे पर स्पीकर को आदेश जारी करेंगे, शुक्रवार को आदेश की कॉपी सुप्रीम कोर्ट में जमा होगी. बता दें, इन विधायकों ने कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष पर उनका इस्तीफा जानबूझकर स्वीकार नहीं करने का आरोप लगाया है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस की पीठ इस याचिका पर सुनवाई की. याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने बुधवार की सुबह जब कर्नाटक के राजनीतिक संकट के मुद्दे का उल्लेख किया गया तो बागी विधायकों को आश्वासन दिया गया कि अदालत देखेगी कि उनकी याचिका को गुरुवार को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है या नहीं.

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